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पत्र लेखन — औपचारिक और अनौपचारिक पत्र प्रारूप

2026-10-31 · 9 min read

पत्र लेखन — औपचारिक और अनौपचारिक पत्र प्रारूप

पत्र लेखन हिंदी परीक्षा का पक्का अंक दिलाने वाला प्रश्न है। पत्र दो प्रकार के होते हैं: औपचारिक पत्र (प्रधानाचार्य, अधिकारी, संपादक आदि को) और अनौपचारिक पत्र (माता-पिता, मित्र, रिश्तेदारों को)। दोनों का प्रारूप अलग होता है।

इस लेख में दोनों के प्रारूप, संबोधन और अभिवादन की तालिका, आम ग़लतियाँ और तीन मौलिक नमूना पत्र दिए गए हैं।

औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में अंतर

आधारऔपचारिक पत्रअनौपचारिक पत्र
किसे लिखा जाता हैप्रधानाचार्य, अधिकारी, संपादक, कंपनीपरिवार के सदस्य, मित्र, रिश्तेदार
भाषाशिष्ट, संक्षिप्त, काम की बातआत्मीय, भावनात्मक, खुली
विषय पंक्तिज़रूरीनहीं होती
उद्देश्यप्रार्थना, शिकायत, सूचना, आवेदनहाल-चाल, बधाई, सलाह, निमंत्रण

औपचारिक पत्र का प्रारूप

  1. प्रेषक का पता (परीक्षा में प्रायः "परीक्षा भवन, क ख ग नगर")
  2. दिनांक
  3. सेवा में, फिर पद, कार्यालय और शहर
  4. विषय: एक पंक्ति में पत्र का उद्देश्य
  5. संबोधन: महोदय / महोदया / माननीय महोदय
  6. विषय-वस्तु: 2–3 अनुच्छेद
  7. समापन: धन्यवाद सहित / सधन्यवाद
  8. भवदीय / भवदीया / प्रार्थी, फिर नाम

ध्यान दें: विद्यालय से जुड़े प्रार्थना-पत्र में प्रायः शुरुआत सीधे "सेवा में" से होती है और अंत में "आपका आज्ञाकारी शिष्य/आपकी आज्ञाकारिणी शिष्या", नाम, कक्षा और दिनांक लिखे जाते हैं। अपने विद्यालय या बोर्ड के नवीनतम प्रारूप का पालन करें।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप

  1. प्रेषक का पता
  2. दिनांक
  3. संबोधन: पूज्य पिताजी / प्रिय मित्र रोहन
  4. अभिवादन: सादर प्रणाम / सप्रेम नमस्ते
  5. कुशलता: अपनी कुशलता बताकर उनकी कुशलता पूछें
  6. मुख्य बात: 1–2 अनुच्छेद
  7. समापन: घर के बड़ों को प्रणाम, छोटों को प्यार
  8. स्वनिर्देश: आपका आज्ञाकारी पुत्र / तुम्हारा प्रिय मित्र, फिर नाम

संबोधन, अभिवादन और स्वनिर्देश की तालिका

किसेसंबोधनअभिवादनस्वनिर्देश (अंत में)
पिताजी / माताजीपूज्य पिताजी / पूजनीया माताजीसादर चरण स्पर्श / सादर प्रणामआपका आज्ञाकारी पुत्र / आपकी आज्ञाकारिणी पुत्री
बड़े भाई / बहनआदरणीय भैया / आदरणीया दीदीसादर नमस्तेआपका छोटा भाई / आपकी छोटी बहन
मित्रप्रिय मित्र / प्रिय सखीसप्रेम नमस्ते / मधुर स्मृतितुम्हारा मित्र / तुम्हारी सखी
छोटा भाई / बहनप्रिय अनुज / प्रिय बहनशुभाशीर्वाद / ढेर सारा प्यारतुम्हारा शुभचिंतक भाई
प्रधानाचार्यमाननीय प्रधानाचार्य जी / महोदय—आपका आज्ञाकारी शिष्य
अधिकारी / संपादकमहोदय / महोदया—भवदीय / भवदीया

नमूना पत्र 1: अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र (औपचारिक)

प्रश्न: आप कक्षा 7 ब के छात्र आदित्य हैं। बुख़ार के कारण तीन दिन का अवकाश माँगते हुए प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखिए।

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
सरस्वती विद्या मंदिर,
कानपुर।

विषय: तीन दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 7 ब का छात्र हूँ। कल रात से मुझे तेज़ बुख़ार है। डॉक्टर ने मुझे तीन दिन आराम करने की सलाह दी है।

अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे 27 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2026 तक तीन दिन का अवकाश देने की कृपा करें। छूटा हुआ कार्य मैं विद्यालय लौटकर पूरा कर लूँगा।

धन्यवाद सहित।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
आदित्य
कक्षा 7 ब, अनुक्रमांक 14
दिनांक: 26 अक्टूबर 2026

नमूना पत्र 2: शिकायती पत्र (औपचारिक)

प्रश्न: अपने मोहल्ले की ख़राब स्ट्रीट लाइटों की शिकायत करते हुए नगर निगम के अधिकारी को पत्र लिखिए।

परीक्षा भवन,
क ख ग नगर।

दिनांक: 24 अक्टूबर 2026

सेवा में,
स्वास्थ्य एवं प्रकाश अधिकारी,
नगर निगम,
वाराणसी।

विषय: मोहल्ले की ख़राब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत हेतु।

महोदय,

मैं आपका ध्यान अपने मोहल्ले की एक गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ। पिछले एक महीने से हमारी गली की अधिकतर स्ट्रीट लाइटें ख़राब पड़ी हैं। शाम होते ही पूरी गली में अँधेरा छा जाता है।

अँधेरे के कारण बुज़ुर्गों और बच्चों को आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। महिलाएँ शाम को बाहर निकलने में असुरक्षित महसूस करती हैं, और दुर्घटना का ख़तरा भी बना रहता है।

अतः आपसे निवेदन है कि शीघ्र ही स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत करवाने की कृपा करें।

सधन्यवाद।

भवदीय,
क ख ग

नमूना पत्र 3: पिताजी को पत्र (अनौपचारिक)

प्रश्न: छात्रावास में रहते हुए अपने पिताजी को अपनी पढ़ाई की तैयारी के बारे में बताते हुए पत्र लिखिए।

छात्रावास, कमरा नं. 12,
प्रयागराज।

दिनांक: 24 अक्टूबर 2026

पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।

मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर भी सब सकुशल होंगे। आपका पत्र मिला; पढ़कर बहुत अच्छा लगा।

आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि अर्धवार्षिक परीक्षा में मुझे गणित और विज्ञान में अच्छे अंक मिले हैं। अब मैंने बोर्ड परीक्षा के लिए समय-सारणी बना ली है। रोज़ सुबह एक घंटा गणित का अभ्यास करता हूँ और रात को हिंदी व अंग्रेज़ी दोहराता हूँ। खाने और सोने का भी पूरा ध्यान रखता हूँ।

माताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा और छोटी को ढेर सारा प्यार। पत्र का उत्तर जल्दी दीजिएगा।

आपका आज्ञाकारी पुत्र,
अमन

आम ग़लतियाँ

  • औपचारिक पत्र में विषय लिखना भूल जाना।
  • अनौपचारिक पत्र में "विषय" लिख देना। इसकी ज़रूरत नहीं होती।
  • संबोधन और स्वनिर्देश का मेल न होना (जैसे पिताजी को पत्र लिखकर अंत में "भवदीय" लिखना)।
  • प्रश्न में दिया गया नाम-पता छोड़कर अपना असली पता लिख देना।
  • एक ही लंबा अनुच्छेद लिखना।

अंग्रेज़ी पत्रों का प्रारूप जानने के लिए देखें: Formal Letter Writing Format।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में मुख्य अंतर क्या है?
औपचारिक पत्र अधिकारियों या संस्थाओं को काम-काज के लिए लिखे जाते हैं और इनमें विषय-पंक्ति होती है। अनौपचारिक पत्र परिवार या मित्रों को लिखे जाते हैं और इनकी भाषा आत्मीय होती है।

औपचारिक पत्र के अंत में क्या लिखते हैं?
"धन्यवाद सहित" या "सधन्यवाद" के बाद "भवदीय/भवदीया" या "प्रार्थी" और अपना नाम। विद्यालय के प्रार्थना-पत्र में "आपका आज्ञाकारी शिष्य" लिखा जाता है।

पिताजी को पत्र में कौन-सा संबोधन लिखें?
"पूज्य पिताजी", उसके बाद अभिवादन में "सादर चरण स्पर्श" या "सादर प्रणाम"।

क्या परीक्षा में अपना असली पता लिखना चाहिए?
नहीं। प्रश्न में दिया गया नाम-पता लिखें। यदि कुछ न दिया हो, तो "परीक्षा भवन, क ख ग नगर" लिखें।

दिनांक कहाँ लिखी जाती है?
अनौपचारिक पत्र और ज़्यादातर औपचारिक पत्रों में प्रेषक के पते के ठीक नीचे। विद्यालय के प्रार्थना-पत्र में कई जगह अंत में नाम के नीचे लिखी जाती है। अपने विद्यालय का प्रारूप देखें।

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पत्र लेखन — औपचारिक और अनौपचारिक पत्र प्रारूप — FAQs

औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में मुख्य अंतर क्या है?

औपचारिक पत्र अधिकारियों या संस्थाओं को काम-काज के लिए लिखे जाते हैं और इनमें विषय-पंक्ति होती है। अनौपचारिक पत्र परिवार या मित्रों को लिखे जाते हैं और इनकी भाषा आत्मीय होती है।

पिताजी को पत्र में कौन-सा संबोधन लिखें?

"पूज्य पिताजी", उसके बाद अभिवादन में "सादर चरण स्पर्श" या "सादर प्रणाम"।

क्या परीक्षा में अपना असली पता लिखना चाहिए?

नहीं। प्रश्न में दिया गया नाम-पता लिखें। यदि कुछ न दिया हो, तो "परीक्षा भवन, क ख ग नगर" लिखें।